| Hungama, Fire and vandalism prevailed during Bandh |
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![]() अपराह्न 1 बजे तक मानगो पुल पर आवागमन प्रभावित रहा। डिमना रोड़ पर खड़ी एक दर्जन से भी अधिक वाहनों को बंद समर्थकों ने तोड़ डाला। इस दौरान पुलिस की भूमिका मूकदर्शक वाली बनी रही। एक प्रशासनिक अधिकारी ने तो यहां तक कह डाला कि क्या करोगे भाई, यह सरकारी बंदी है। बंद समर्थकों ने जिस तरह से शहर में फोर्स की मौजूदगी में अपनी मनमानी की, उसे देखकर इस अधिकारी की बात शत-प्रतिशत सही निकली। सारी सुरक्षा व्यवस्था को मुंह चिढ़ाते हुए शहर को एक तरह से कब्जे में ही ले लिया था। प्रशासन नाम की कोई चीज नहीं बची थी। पुलिस के सामने लोग पीटे जा रहे थे, वाहनों में तोड़फोड़ की जाती रही। हालांकि दिखावे के लिए शहर भर में 614 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिन्हें शाम को छोड़ दिया गया। अति संवेदनशील करनडीह, परसुडीह, सुंदरनगर में तो साइकिल वालों को भी नहीं चलने दिया गया। तकरीबन हर चौक-चौराहे पर टायर जलते रहे। शाम करीब 4 बजे लगा कि माहौल सामान्य हो गया है। उच्च पथ के किनारे स्थित होटलों पर रुके ट्रकों का जब चक्का घूमना शुरू हुआ तो देवघर के पास बंद समर्थकों का एक जत्था फिर सड़क पर आ गया। एक-एक कर चार वाहनों को आग के हवाले कर दिया। एक ट्रक पर कदमा के किसी डाक्टर का घरेलू सामान अहमदाबाद से लाया जा रहा था। एक ट्रेलर पर रबर लदा था। एक अन्य ट्रक व टाटा 207 भी आगजनी की चपेट में आ गया। सूचना मिलने पर एसपी नवीन कुमार सिंह सहित तमाम पुलिस पदाधिकारी मौके पर पहुंचे। आग बुझाने के लिए फायर ब्रिगेड की चार गाडि़यां बुलवायी गयीं। देर रात तक आग पर काबू पाने का प्रयास जारी रहा। आग लगाने के आरोप में मौके से तीन लोगों को गिरफ्तार भी किया गया। इधर मानगो पुल पर भी बंद समर्थकों का तांडव होता रहा, पुलिस चौक के पास स्थित बूथ के अंदर दुबकी रही। ऐसा लग रहा था कि इस बंद को पुलिस का समर्थन हासिल है। गम्हरिया में टायो गेट पर दिन भर जाम लगा रहा, जिसके कारण लोगों को आने-जाने में काफी परेशानी हुई। बंद समर्थक इस कदर हिंसा पर उतारू हो गये कि ठेले वालों को भी नहीं छोड़ा। काफी दिनों बाद बंदी का आतंक ऐसा रहा कि टेम्पो भी नहीं चले। ट्रेनों में बादामपहाड़ पैसेंजर, जनशताब्दी एक्सप्रेस ट्रेन भी बंद समर्थकों ने रोकी।
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