“A fact of My Lai, Abu Ghraib, Guantanamo and no doubt countless other atrocities is that when the cause is rotten, the rot filters down to everyone involved in it. The cause for which my generation was sent to Viet Nam was a false one, later admitted by those who orchestrated it. Those of us who did our duty in Viet Nam enabled our country to poison the land and water of that poor country with an especially virulent form of dioxin, Agent Orange. We would need hundreds of Memorial Walls to contain the names of the Vietnamese killed in that foolish war.”
Doug Nelson, truthout.org
Simpons @ Tatanagar
Comic Book Guy: Stop right there! I have the only working fazer ever built. It was fired only once to keep William Shatner from making another album.
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City needs 350 Rooms Hotel
Apr 28, जमशेदपुर। हाल के दिनों में शहर में व्यापारिक गतिविधियां इतनी तेजी से बढ़ी हैं कि होटलों में कमरे नहीं मिल रहे हैं। इस समस्या से हर कोई रूबरू होता है, लेकिन उसकी समझ में यह नहीं आता कि ऐसा क्यों है? जबकि इस शहर में जमशेदपुर होटलियर्स एसोसिएशन से संबद्ध करीब 70 छोटे-बड़े होटल हैं, लेकिन कुल मिलाकर इन होटलों में करीब दो-ढाई सौ कमरे ही हैं। यही कारण है कि प्रतिदिन तीन-चार सौ लोगों को मनपसंद होटलों में कमरे नहीं मिल पाते, जिसके बाद उन्हें दूसरे होटल, लॉज या गेस्ट हाउस में एडजस्ट करना पड़ता है। यह समस्या खासकर एलिट क्लास के होटलों में ज्यादा है। होटलियर्स एसोसिशन का भी मानना है कि इस शहर को करीब 350 कमरों की और जरूरत है, क्योंकि इनमें से लगभग सभी होटल में 25-30 प्रतिशत कमरे कारपोरेट या बिजनेस घरानों के नाम पर हमेशा बुक रहते हैं। बाकी किसी विशेष समारोह, शादी-ब्याह आदि कारणों से होटल के कमरे फुल रहते हैं।
कभी-कभी तो ऐसी नौबत आती है कि इकोनोमी क्लास के होटलों में तो जगह मिल भी जाती है, एलिट क्लास के पांच-छह होटलों में तो कमरे बड़ी मुश्किल से ही मिल पाते हैं। इस संबंध में होटल व्यवसाय से लंबे समय से जुडे़ सौमित्र राय बताते हैं कि पहले ऐसा नहीं था। 1994-96 में जब टाटा स्टील का विस्तारीकरण हो रहा था, तो शहर में धड़ाधड़ होटल खुलने लगे, लेकिन दो साल बाद उनमें ठहरने वाले नहीं मिल रहे थे। शहर के होटल उद्योग के लिए 1998-2001 तक समय सबसे ज्यादा निराशाजनक रहा, क्योंकि उस वक्त टाटा स्टील भी मंदी की दौर से गुजर रहा था। हालांकि 2002 के बाद से शहर में कंपनी का विस्तारीकरण और व्यापारिक गतिविधियां तेजी से बढ़ीं और यह स्थिति लगातार बनी हुई है। यही कारण है कि अब होटलों में कमरों की कमी हो गई है। ज्यादातर कारपोरेट व व्यापारिक घरानों ने लंबे समय तक शहर के अच्छे होटलों में बुकिंग करा रखी है। यही कारण है कि शहर के एक बड़े संस्थान ने सितंबर में होने वाले अपने वार्षिकोत्सव के लिए अभी से 20 कमरे बुक करा लिए हैं। यहां एडवांस बुकिंग की परंपरा भी हाल के वर्षो में शुरू हुई है।वैसे यहां होटल खोलने के लिए टाटा ग्रुप के अलावा कई अन्य दिग्गजों ने आवेदन भी दे रखा है, लेकिन उचित स्थान नहीं मिलने की वजह से करीब छह-सात बड़े होटल नहीं खुल पा रहे हैं। श्री राय का मानना है कि जितनी तेजी से यहां आने वालों की संख्या बढ़ रही है, उसमें इतने कमरे भी पर्याप्त नहीं होंगे, लेकिन कुछ हद तक इसकी भरपाई हो जाएगी।